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mahabharat 11.27.13-14h: माता के मुख से ये अप्रिय वचन सुनकर समस्त पाण्डव अत्यन्त दुःखी हो गए और कर्ण के लिए बार-बार विलाप करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 11.27: सभी स्त्री-पुरुषोंका अपने मरे हुए सम्बन्धियोंको जलांजलि देना, कुन्तीका अपने गर्भसे कर्णके जन्म होनेका रहस्य प्रकट करना तथा युधिष्ठिरका कर्णके लिये शोक प्रकट करते हुए उनका प्रेतकृत्य सम्पन्न करना और स्त्रियोंके मनमें रहस्यकी बात न छिपनेका शाप देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 27: सभी स्त्री-पुरुषोंका अपने मरे हुए सम्बन्धियोंको जलांजलि देना, कुन्तीका अपने गर्भसे कर्णके जन्म होनेका रहस्य प्रकट करना तथा युधिष्ठिरका कर्णके लिये शोक प्रकट करते हुए उनका प्रेतकृत्य सम्पन्न करना और स्त्रियोंके मनमें रहस्यकी बात न छिपनेका शाप देना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  11.27.13-14h 
श्रुत्वा तु पाण्डवा: सर्वे मातुर्वचनमप्रियम्॥ १३॥
कर्णमेवानुशोचन्तो भूय: क्लान्ततराभवन्।
 
 
अनुवाद
माता के मुख से ये अप्रिय वचन सुनकर समस्त पाण्डव अत्यन्त दुःखी हो गए और कर्ण के लिए बार-बार विलाप करने लगे।
 
On hearing these unpleasant words from their mother, all the Pandavas were in great pain, lamenting repeatedly for Karna. 13 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)