श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 26: प्राप्त अनुस्मृतिविद्या और दिव्यदृष्टिके प्रभावसे युधिष्ठिरका महाभारतयुद्धमें मारे गये लोगोंकी संख्या और गतिका वर्णन तथा युधिष्ठिरकी आज्ञासे सबका दाह-संस्कार  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  11.26.6 
वैशम्पायन उवाच
तच्छ्रुत्वा वासुदेवस्य पुनरुक्तं वचोऽप्रियम्।
तूष्णीं बभूव गान्धारी शोकव्याकुललोचना॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! श्रीकृष्ण के वे अप्रिय वचन सुनकर गांधारी पुनः मौन हो गयीं। उनकी आँखें शोक से भर आयीं।
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! On hearing those unpleasant words spoken by Shri Krishna again, Gandhari became silent. Her eyes were filled with grief.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)