श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 26: प्राप्त अनुस्मृतिविद्या और दिव्यदृष्टिके प्रभावसे युधिष्ठिरका महाभारतयुद्धमें मारे गये लोगोंकी संख्या और गतिका वर्णन तथा युधिष्ठिरकी आज्ञासे सबका दाह-संस्कार  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  11.26.5 
तपोर्थीयं ब्राह्मणी धत्त गर्भं
गौर्वोढारं धावितारं तुरङ्गी।
शूद्रा दासं पशुपालं च वैश्या
वधार्थीयं त्वद्विधा राजपुत्री॥ ५॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण स्त्री तपस्या के लिए, गाय बोझा ढोने के लिए, घोड़ी तेज दौड़ने के लिए, शूद्र सेवा के लिए, वैश्य कन्या गौपालन के लिए तथा तुम्हारी जैसी राजकुमारी युद्ध में लड़ने और मरने के लिए पुत्र को जन्म देती है।
 
A Brahmin woman gives birth to a son for penance, a cow for carrying loads, a mare for running fast, a Shudra for service, a Vaishya girl for rearing cattle and a princess like you gives birth to a son to fight and die in the war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)