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श्री महाभारत
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पर्व 11: स्त्री पर्व
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अध्याय 26: प्राप्त अनुस्मृतिविद्या और दिव्यदृष्टिके प्रभावसे युधिष्ठिरका महाभारतयुद्धमें मारे गये लोगोंकी संख्या और गतिका वर्णन तथा युधिष्ठिरकी आज्ञासे सबका दाह-संस्कार
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श्लोक 44
श्लोक
11.26.44
कारयित्वा क्रियास्तेषां कुरुराजो युधिष्ठिर:।
धृतराष्ट्रं पुरस्कृत्य गङ्गामभिमुखोऽगमत्॥ ४४॥
अनुवाद
इस प्रकार उन सबका दाह संस्कार करने के बाद, कुरु नरेश युधिष्ठिर, धृतराष्ट्र को साथ लेकर गंगा नदी की ओर चल पड़े।
After thus cremating them all, Kuru King Yudhishthira proceeded towards river Ganga with Dhritarashtra in the lead.
इति श्रीमहाभारते स्त्रीपर्वणि श्राद्धपर्वणि कुरूणामौर्ध्वदेहिके षड्विंशोऽध्याय:॥ २६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत स्त्रीपर्वके अन्तर्गत श्राद्धपर्वमें कौरवोंका और्ध्वदैहिक संस्कारविषयक छब्बीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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