श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 26: प्राप्त अनुस्मृतिविद्या और दिव्यदृष्टिके प्रभावसे युधिष्ठिरका महाभारतयुद्धमें मारे गये लोगोंकी संख्या और गतिका वर्णन तथा युधिष्ठिरकी आज्ञासे सबका दाह-संस्कार  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  11.26.40 
साम्नामृचां च नादेन स्त्रीणां च रुदितस्वनै:।
कश्मलं सर्वभूतानां निशायां समपद्यत॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
उस रात्रि में सामवेद के मन्त्रों और स्तुतियों के विलाप से वहाँ के समस्त प्राणियों को बड़ा कष्ट हुआ ॥40॥
 
The sound of the chants and hymns of the Samaveda and the wailing of women caused great distress to all the creatures there that night. ॥40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)