धृतराष्ट्र उवाच
अनाथानां जनानां च सनाथानां च भारत।
कच्चित् तेषां शरीराणि धक्ष्यसे विधिपूर्वकम्॥ २१॥
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा - भरत! क्या तुम यहाँ मृत पड़े अनाथ और उपेक्षित योद्धाओं के शवों का उचित दाह-संस्कार करोगे?॥ 21॥
Dhritarashtra asked - Bharata! Will you arrange for the proper cremation of the bodies of the orphaned and uncared for warriors who are lying dead here?॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥