श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 26: प्राप्त अनुस्मृतिविद्या और दिव्यदृष्टिके प्रभावसे युधिष्ठिरका महाभारतयुद्धमें मारे गये लोगोंकी संख्या और गतिका वर्णन तथा युधिष्ठिरकी आज्ञासे सबका दाह-संस्कार  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  11.26.15-16 
पात्यमाना: परैर्ये तु हीयमाना निरायुधा:।
ह्रीनिषेवा महात्मान: परानभिमुखा रणे॥ १५॥
छिद्यमाना: शितै: शस्त्रै: क्षत्रधर्मपरायणा:।
गतास्ते ब्रह्मसदनं न मेऽत्रास्ति विचारणा॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जो महामनस्वी पुरुष शत्रुओं द्वारा गिरा दिए गए, युद्ध करने के लिए जिनके पास कोई साधन नहीं था, जो शस्त्रहीन हो गए थे और जो उस अवस्था में भी अपनी लज्जा के कारण युद्धस्थल में शत्रुओं का निरन्तर सामना करते रहे और तीक्ष्ण शस्त्रों द्वारा काट डाले गए, वे क्षत्रिय धर्म में तत्पर पुरुष ब्रह्मलोक को गए हैं; इस विषय में मेरा और कोई मत नहीं है ॥15-16॥
 
Those great-minded men who were felled by the enemy, who had no means of fighting, who became weaponless and who, due to their modesty even in that condition, were continuously facing the enemies on the battlefield and were cut down by sharp weapons, those men devoted to the Kshatriya Dharma have gone to Brahmaloka; I have no other opinion on this matter. ॥15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)