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mahabharat 11.25.8: श्री कृष्ण! इन बड़े-बड़े नेत्रों वाली रानियों की मधुर वाणी और विलापपूर्ण पुकार मेरे मन और कानों को मोहित कर रही है, और मैं लगभग अचेत हो जा रहा हूँ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 11.25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  11.25.8 
आसामायतनेत्राणां सुस्वराणां जनार्दन।
मन:श्रुतिहरो नादो मनो मोहयतीव मे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! इन बड़े-बड़े नेत्रों वाली रानियों की मधुर वाणी और विलापपूर्ण पुकार मेरे मन और कानों को मोहित कर रही है, और मैं लगभग अचेत हो जा रहा हूँ॥8॥
 
Sri Krishna! The sweet-voiced and wailing cries of these queens with big eyes captivate my mind and ears, making me almost unconscious. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)