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mahabharat 11.25.47: वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! उन गंभीर वचनों को सुनकर महामना वासुदेवनन्दन श्रीकृष्ण ने मुस्कुराते हुए गांधारी देवी से कहा - 47॥   |   mahabharat अध्याय 11.25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  11.25.47 
वैशम्पायन उवाच
तच्छ्रुत्वा वचनं घोरं वासुदेवो महामना:।
उवाच देवीं गान्धारीमीषदभ्युत्स्मयन्निव॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! उन गंभीर वचनों को सुनकर महामना वासुदेवनन्दन श्रीकृष्ण ने मुस्कुराते हुए गांधारी देवी से कहा - 47॥
 
Vaishampayanji says- Rajan! Hearing those grave words, the great man Vasudevanandan Shri Krishna said to Gandhari Devi with a smile - 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)