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mahabharat 11.25.44-45: मधुसूदन! आज से छत्तीसवाँ वर्ष बीतने पर तुम्हारे सभी सम्बन्धी, मंत्री और पुत्र आपस में लड़कर मर जाएँगे। तुम अनाथ की भाँति वन में भटकोगे, सबकी नज़रों से ओझल हो जाओगे और किसी घृणित कार्य से मरोगे।   |   mahabharat अध्याय 11.25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना  »  श्लोक 44-45
 
 
श्लोक  11.25.44-45 
त्वमप्युपस्थिते वर्षे षट्‍‍त्रिंशे मधुसूदन।
हतज्ञातिर्हतामात्यो हतपुत्रो वनेचर:॥ ४४॥
अनाथवदविज्ञातो लोकेष्वनभिलक्षित:।
कुत्सितेनाभ्युपायेन निधनं समवाप्स्यसि॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! आज से छत्तीसवाँ वर्ष बीतने पर तुम्हारे सभी सम्बन्धी, मंत्री और पुत्र आपस में लड़कर मर जाएँगे। तुम अनाथ की भाँति वन में भटकोगे, सबकी नज़रों से ओझल हो जाओगे और किसी घृणित कार्य से मरोगे।
 
Madhusudan! When the 36th year from today comes, all your relatives, ministers and sons will fight amongst themselves and die. You will wander in the forest like an orphan, unknown to all and out of sight of people, and will die by some despicable means.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)