श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  11.25.42 
पतिशुश्रूषया यन्मे तप: किंचिदुपार्जितम्।
तेन त्वां दुरवापेन शप्स्ये चक्रगदाधर॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
हे चक्र और गदाधारी केशव! मैं अपने पति की सेवा से प्राप्त हुई दुर्लभ तपशक्ति से तुम्हें शाप दे रही हूँ ॥ 42॥
 
O Kesava, wielding the discus and the mace, I am cursing you with the rare austerity powers that I have acquired by serving my husband. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)