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mahabharat 11.25.39: गांधारी बोली - हे श्रीकृष्ण! जनार्दन! पाण्डव और धृतराष्ट्र के पुत्र आपस में लड़कर भस्म हो गए। उन्हें नष्ट होते देखकर भी आप उनकी उपेक्षा कैसे कर सकते थे?॥ 39॥   |   mahabharat अध्याय 11.25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  11.25.39 
गान्धार्युवाच
पाण्डवा धार्तराष्ट्राश्च दग्धा: कृष्ण परस्परम्।
उपेक्षिता विनश्यन्तस्त्वया कस्माज्जनार्दन॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
गांधारी बोली - हे श्रीकृष्ण! जनार्दन! पाण्डव और धृतराष्ट्र के पुत्र आपस में लड़कर भस्म हो गए। उन्हें नष्ट होते देखकर भी आप उनकी उपेक्षा कैसे कर सकते थे?॥ 39॥
 
Gandhari said—Shri Krishna! Janardan! The sons of the Pandavas and Dhritarashtra fought among themselves and were reduced to ashes. How could you ignore them even after seeing them getting destroyed?॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)