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mahabharat 11.25.36: जनार्दन! उनका यह दर्शन मिथ्या नहीं हो सकता था; इसलिए मेरे सभी पुत्र युद्ध की अग्नि में कुछ ही समय में भस्म हो गए।   |   mahabharat अध्याय 11.25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  11.25.36 
तयोर्हि दर्शनं नैतन्मिथ्या भवितुमर्हति।
अचिरेणैव मे पुत्रा भस्मीभूता जनार्दन॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
जनार्दन! उनका यह दर्शन मिथ्या नहीं हो सकता था; इसलिए मेरे सभी पुत्र युद्ध की अग्नि में कुछ ही समय में भस्म हो गए।
 
Janardan! This vision of theirs could not be false; therefore, in a short time all my sons were burnt to ashes in the fire of war. 36.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)