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mahabharat 11.25.35: उसी दिन शान्तनुपुत्र भीष्म और बुद्धिमान विदुर ने मुझसे कहा था कि ‘अब तुम्हें अपने पुत्रों से प्रेम नहीं करना चाहिए।’ ॥35॥   |   mahabharat अध्याय 11.25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  11.25.35 
शान्तनोश्चैव पुत्रेण प्राज्ञेन विदुरेण च।
तदैवोक्तास्मि मा स्नेहं कुरुष्वात्मसुतेष्विति॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
उसी दिन शान्तनुपुत्र भीष्म और बुद्धिमान विदुर ने मुझसे कहा था कि ‘अब तुम्हें अपने पुत्रों से प्रेम नहीं करना चाहिए।’ ॥35॥
 
That very day, Shantanu's son Bhishma and the wise Vidur had told me that 'Now you should not love your sons.' ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)