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mahabharat 11.25.28: माधव! जैसे ग्रीष्म ऋतु में वायु के वेग से दो पुष्पित शाल वृक्ष गिर पड़े हैं, उसी प्रकार अवन्ति के दो पराक्रमी राजकुमार विन्द और अनुविन्द भी गिर पड़े हैं। उन्हें देखो। 28।   |   mahabharat अध्याय 11.25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  11.25.28 
विन्दानुविन्दावावन्त्यौ पतितौ पश्य माधव।
हिमान्ते पुप्पितौ शालौ मरुता गलिताविव॥ २८॥
 
 
अनुवाद
माधव! जैसे ग्रीष्म ऋतु में वायु के वेग से दो पुष्पित शाल वृक्ष गिर पड़े हैं, उसी प्रकार अवन्ति के दो पराक्रमी राजकुमार विन्द और अनुविन्द भी गिर पड़े हैं। उन्हें देखो। 28।
 
Madhava! Just as two sal trees in full bloom have fallen due to the force of wind in the summer season, in the same way the two valiant princes of Avanti, Vind and Anuvind, have fallen down. Look at them. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)