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mahabharat 11.25.26: मधुसूदन! युद्धभूमि में शत्रुओं से लड़ते समय भी उन्होंने अपने पिता को कभी नहीं छोड़ा था; आज भी युद्ध के बाद वे अपने पिता को नहीं छोड़ पाए हैं।   |   mahabharat अध्याय 11.25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  11.25.26 
पितरं नूनमाजिस्थं युद्धॺमानं परै: सह।
नाजहात् पितरं वीरमद्यापि मधुसूदन॥ २६॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! युद्धभूमि में शत्रुओं से लड़ते समय भी उन्होंने अपने पिता को कभी नहीं छोड़ा था; आज भी युद्ध के बाद वे अपने पिता को नहीं छोड़ पाए हैं।
 
Madhusudan! He had never deserted his father while he was fighting with the enemies on the battlefield; even today, after the war, he has not been able to desert his father.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)