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mahabharat 11.25.18: कमलनयन! पांचाल नरेश का वह निर्मल श्वेत छत्र शरद् के चन्द्रमा के समान शोभायमान हो रहा है॥18॥   |   mahabharat अध्याय 11.25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  11.25.18 
पाञ्चालराज्ञो विमलं पुण्डरीकाक्ष पाण्डुरम्।
आतपत्रं समाभाति शरदीव निशाकर:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
कमलनयन! पांचाल नरेश का वह निर्मल श्वेत छत्र शरद् के चन्द्रमा के समान शोभायमान हो रहा है॥18॥
 
Kamalnayan! That pure white canopy of Panchala king is becoming beautiful like the autumn moon. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)