Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.25.14: द्रोणाचार्य प्रज्वलित अग्नि के समान थे, उनका रथ स्वयं अग्नि था, धनुष स्वयं उस अग्नि की ज्वाला था, बाण, शक्ति और गदा समिधा का कार्य प्रदान कर रहे थे, धृष्टद्युम्न के पुत्र द्रोण रूपी उस अग्नि में पतंगों की भाँति जलकर भस्म हो गये। | mahabharat अध्याय 11.25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्रोणाचार्य प्रज्वलित अग्नि के समान थे, उनका रथ स्वयं अग्नि था, धनुष स्वयं उस अग्नि की ज्वाला था, बाण, शक्ति और गदा समिधा का कार्य प्रदान कर रहे थे, धृष्टद्युम्न के पुत्र द्रोण रूपी उस अग्नि में पतंगों की भाँति जलकर भस्म हो गये।
Dronacharya was like a blazing fire, his chariot itself was the fire, the bow itself was the flame of that fire, the arrows, power and mace were providing the work of Samidha, Dhrishtadyumna's sons were burnt to ashes like kites in that fire in the form of Drona.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥