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mahabharat 11.24.5: सौभाग्यवश तुम भूरिश्रवा के उस वीर पुत्र की मृत्यु का दुःख नहीं देख रहे हो, जिसकी ध्वजा पर यूप का चिन्ह अंकित था, जो हजारों स्वर्ण मुद्राओं की प्रचुर दक्षिणा देता था तथा जिसने अनेक यज्ञों का अनुष्ठान सम्पन्न किया था।   |   mahabharat अध्याय 11.24: भूरिश्रवाके पास उसकी पत्नियोंका विलाप, उन सबको तथा शकुनिको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख शोेकोद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 24: भूरिश्रवाके पास उसकी पत्नियोंका विलाप, उन सबको तथा शकुनिको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख शोेकोद्‍गार  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  11.24.5 
दिष्टॺा यूपध्वजं पुत्रं वीरं भूरिसहस्रदम्।
अनेकक्रतुयज्वानं निहतं नानुपश्यसि॥ ५॥
 
 
अनुवाद
सौभाग्यवश तुम भूरिश्रवा के उस वीर पुत्र की मृत्यु का दुःख नहीं देख रहे हो, जिसकी ध्वजा पर यूप का चिन्ह अंकित था, जो हजारों स्वर्ण मुद्राओं की प्रचुर दक्षिणा देता था तथा जिसने अनेक यज्ञों का अनुष्ठान सम्पन्न किया था।
 
'Fortunately you are not witnessing the pain of the death of that brave son of Bhurishrava, whose flag bore the symbol of a yupa, who used to give lavish dakshina of thousands of gold coins and who had completed the rituals of many yagnas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)