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mahabharat 11.24.4: महाराज! सौभाग्यवश आपको भरतवंश का भयंकर विनाश, कुरुवंश का महाविनाश, जो महाप्रलय के समान था, देखने का अवसर नहीं मिला॥4॥   |   mahabharat अध्याय 11.24: भूरिश्रवाके पास उसकी पत्नियोंका विलाप, उन सबको तथा शकुनिको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख शोेकोद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 24: भूरिश्रवाके पास उसकी पत्नियोंका विलाप, उन सबको तथा शकुनिको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख शोेकोद्‍गार  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  11.24.4 
दिष्टॺा नैनं महाराज दारुणं भरतक्षयम्।
कुरुसंक्रन्दनं घोरं युगान्तमनुपश्यसि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! सौभाग्यवश आपको भरतवंश का भयंकर विनाश, कुरुवंश का महाविनाश, जो महाप्रलय के समान था, देखने का अवसर नहीं मिला॥4॥
 
‘Maharaj! Fortunately you have not had the opportunity to witness the terrible destruction of the Bharat dynasty, the massive annihilation of the Kuru clan which was like a terrible deluge.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)