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mahabharat 11.24.30: मधुसूदन! मेरे पुत्र सरल बुद्धि वाले हैं। मुझे भय है कि उन पवित्र लोकों में पहुँचकर शकुनि पुनः सभी भाइयों में कलह उत्पन्न कर देगा।   |   mahabharat अध्याय 11.24: भूरिश्रवाके पास उसकी पत्नियोंका विलाप, उन सबको तथा शकुनिको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख शोेकोद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 24: भूरिश्रवाके पास उसकी पत्नियोंका विलाप, उन सबको तथा शकुनिको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख शोेकोद्‍गार  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  11.24.30 
कथं च नायं तत्रापि पुत्रान्मे भ्रातृभि: सह।
विरोधयेदृजुप्रज्ञाननृजुर्मधुसूदन॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! मेरे पुत्र सरल बुद्धि वाले हैं। मुझे भय है कि उन पवित्र लोकों में पहुँचकर शकुनि पुनः सभी भाइयों में कलह उत्पन्न कर देगा।
 
Madhusudan! My sons are simple minded. I fear that after reaching those holy worlds, Shakuni may again create conflicts among all the brothers. 30.
 
इति श्रीमहाभारते स्त्रीपर्वणि स्त्रीविलापपर्वणि गान्धारीवाक्ये चतुर्विंशोऽध्याय:॥ २४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत स्त्रीपर्वके अन्तर्गत स्त्रीविलापपर्वमें गान्धारीवाक्यविषयक चौबीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)