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mahabharat 11.24.27: श्री कृष्ण! आज शकुनि (पक्षी) सब ओर से इस शकुनि की पूजा करते हैं। इसने मेरे पुत्रों का नाश करने के लिए ही जुआ या छल की विद्या सीखी थी॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 11.24: भूरिश्रवाके पास उसकी पत्नियोंका विलाप, उन सबको तथा शकुनिको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख शोेकोद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 24: भूरिश्रवाके पास उसकी पत्नियोंका विलाप, उन सबको तथा शकुनिको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख शोेकोद्‍गार  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  11.24.27 
शकुन्ता: शकुनिं कृष्ण समन्तात् पर्युपासते।
कैतवं मम पुत्राणां विनाशायोपशिक्षितम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! आज शकुनि (पक्षी) सब ओर से इस शकुनि की पूजा करते हैं। इसने मेरे पुत्रों का नाश करने के लिए ही जुआ या छल की विद्या सीखी थी॥ 27॥
 
Shri Krishna! Today, Shakuni (birds) worship this Shakuni from all sides. He had learnt the art of gambling or cunning only to destroy my sons.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)