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mahabharat 11.24.19: यह वही हाथ है जो हमारी पेटियाँ खींचता था, हमारे उभरते हुए स्तनों को सहलाता था, हमारी नाभि, जांघों और जघन-प्रदेश को छूता था और हमारी कमरबंद को ढीला करता था।॥19॥   |   mahabharat अध्याय 11.24: भूरिश्रवाके पास उसकी पत्नियोंका विलाप, उन सबको तथा शकुनिको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख शोेकोद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 24: भूरिश्रवाके पास उसकी पत्नियोंका विलाप, उन सबको तथा शकुनिको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख शोेकोद्‍गार  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  11.24.19 
अयं स रसनोत्कर्षी पीनस्तनविमर्दन:।
नाभ्यूरुजघनस्पर्शी नीवीविस्रंसन: कर:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
यह वही हाथ है जो हमारी पेटियाँ खींचता था, हमारे उभरते हुए स्तनों को सहलाता था, हमारी नाभि, जांघों और जघन-प्रदेश को छूता था और हमारी कमरबंद को ढीला करता था।॥19॥
 
‘This is the same hand that used to pull our belts, fondle our budding breasts, touch our navel, thighs and pubic region and loosen our waistband.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)