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mahabharat 11.23.5: श्री कृष्ण! शल्य के मुख से सोने के समान चमकीली जीभ निकली है, जो सोने के समान चमक रही है, और पक्षी उसे नोच-नोचकर खा रहे हैं॥5॥   |   mahabharat अध्याय 11.23: शल्य, भगदत्त, भीष्म और द्रोणको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख गान्धारीका विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 23: शल्य, भगदत्त, भीष्म और द्रोणको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख गान्धारीका विलाप  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  11.23.5 
अस्य चामीकराभस्य तप्तकाञ्चनसप्रभा।
आस्याद् विनि:सृता जिह्वा भक्ष्यते कृष्ण पक्षिभि:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! शल्य के मुख से सोने के समान चमकीली जीभ निकली है, जो सोने के समान चमक रही है, और पक्षी उसे नोच-नोचकर खा रहे हैं॥5॥
 
Sri Krishna! A tongue shining like gold has come out from the mouth of Shalya, shining like gold, and the birds are plucking and eating it. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)