Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.23.41-42: अग्निहोत्रसहित द्रोणाचार्य को चितकी अग्नि में स्थापित करके उनकी आहुति दो। उनके शिष्य द्विजाति लोग कृपी को आगे और चिता को दाहिनी ओर रखकर गंगा तट की ओर जा रहे हैं। 41-42॥ | mahabharat अध्याय 11.23: शल्य, भगदत्त, भीष्म और द्रोणको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख गान्धारीका विलाप । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अग्निहोत्रसहित द्रोणाचार्य को चितकी अग्नि में स्थापित करके उनकी आहुति दो। उनके शिष्य द्विजाति लोग कृपी को आगे और चिता को दाहिनी ओर रखकर गंगा तट की ओर जा रहे हैं। 41-42॥
Place Dronacharya along with Agnihotra in the fire of Chitaki and offer him oblation. His disciples, the twice-caste people, are going towards the banks of Ganga with Kripi in front and the pyre on the right. 41-42॥
इति श्रीमहाभारते स्त्रीपर्वणि स्त्रीविलापपर्वणि गान्धारीवचने त्रयोविंशोऽध्याय:॥ २३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत स्त्रीपर्वके अन्तर्गत स्त्रीविलापपर्वमें गान्धारीवचनविषयक तेईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥