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mahabharat 11.23.38: अग्नि को अच्छी तरह प्रज्वलित करने के बाद, चिता को चारों ओर से जला दिया गया और द्रोणाचार्य के शरीर को उस पर रखकर, साम स्तोत्र गाते हुए ब्राह्मणों ने त्रिविध साम स्तोत्र गाना शुरू कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 11.23: शल्य, भगदत्त, भीष्म और द्रोणको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख गान्धारीका विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 23: शल्य, भगदत्त, भीष्म और द्रोणको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख गान्धारीका विलाप  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  11.23.38 
अग्नीनाधाय विधिवच्चितां प्रज्वाल्य सर्वत:।
द्रोणमाधाय गायन्ति त्रीणि सामानि सामगा:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
अग्नि को अच्छी तरह प्रज्वलित करने के बाद, चिता को चारों ओर से जला दिया गया और द्रोणाचार्य के शरीर को उस पर रखकर, साम स्तोत्र गाते हुए ब्राह्मणों ने त्रिविध साम स्तोत्र गाना शुरू कर दिया।
 
After properly lighting the fire, the pyre was lit from all sides and placing the body of Dronacharya on it, the brahmins singing the Sama hymns began singing the Trividha Sama hymns.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)