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mahabharat 11.23.36: केशव! युद्धस्थल में जटाधारी ब्रह्मचारिणी कृपी द्रोणाचार्य के पास बैठी हैं, जिनका कवच धृष्टद्युम्न के बाणों से छिन्न-भिन्न हो गया है।   |   mahabharat अध्याय 11.23: शल्य, भगदत्त, भीष्म और द्रोणको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख गान्धारीका विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  11.23.36 
बाणैर्भिन्नतनुत्राणं धृष्टद्युम्नेन केशव।
उपास्ते वै मृधे द्रोणं जटिला ब्रह्मचारिणी॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
केशव! युद्धस्थल में जटाधारी ब्रह्मचारिणी कृपी द्रोणाचार्य के पास बैठी हैं, जिनका कवच धृष्टद्युम्न के बाणों से छिन्न-भिन्न हो गया है।
 
Keshav! On the battlefield, the matted-haired brahmacharini Kripi is sitting next to Drona whose armour had been torn to pieces by Dhrishtadyumna's arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)