Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.23.32-33: केशव! जिस प्रकार वेद अनादि काल से प्रजापति ब्रह्मा से कभी अलग नहीं हुए, उसी प्रकार चारों वेद और समस्त अस्त्र-शस्त्र भी वीर द्रोण से कभी अलग नहीं हुए, उसी योद्धा के ये दो सुंदर एवं पूजनीय चरण, जिनकी सैकड़ों शिष्यों ने पूजा की है, गीदड़ों द्वारा घसीटे जा रहे हैं। | mahabharat अध्याय 11.23: शल्य, भगदत्त, भीष्म और द्रोणको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख गान्धारीका विलाप । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
केशव! जिस प्रकार वेद अनादि काल से प्रजापति ब्रह्मा से कभी अलग नहीं हुए, उसी प्रकार चारों वेद और समस्त अस्त्र-शस्त्र भी वीर द्रोण से कभी अलग नहीं हुए, उसी योद्धा के ये दो सुंदर एवं पूजनीय चरण, जिनकी सैकड़ों शिष्यों ने पूजा की है, गीदड़ों द्वारा घसीटे जा रहे हैं।
Keshav! Just as the Vedas were never separated from Prajapati Brahma since time immemorial, similarly the four Vedas and all the weapons were never separated from the valiant Drona, these two beautiful and venerable feet of the same warrior, which have been worshipped by hundreds of disciples, are being dragged by jackals.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥