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mahabharat 11.23.31: माधव! युद्ध में मारे जाने पर भी द्रोणाचार्य के धनुष की मुट्ठी ढीली नहीं हुई है। दस्ताना भी ऐसा प्रतीत होता है, मानो वह किसी जीवित व्यक्ति के हाथ में हो।॥31॥   |   mahabharat अध्याय 11.23: शल्य, भगदत्त, भीष्म और द्रोणको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख गान्धारीका विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 23: शल्य, भगदत्त, भीष्म और द्रोणको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख गान्धारीका विलाप  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  11.23.31 
धनुर्मुष्टिरशीर्णश्च हस्तावापश्च माधव।
द्रोणस्य निहतस्याजौ दृश्यते जीवतो यथा॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
माधव! युद्ध में मारे जाने पर भी द्रोणाचार्य के धनुष की मुट्ठी ढीली नहीं हुई है। दस्ताना भी ऐसा प्रतीत होता है, मानो वह किसी जीवित व्यक्ति के हाथ में हो।॥31॥
 
Madhava! Even after being killed in the war, the fist held by Dronacharya's bow has not become loose. The glove too appears intact, as if it is in the hand of a living person. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)