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mahabharat 11.23.28: जिनके आशीर्वाद से पाण्डवपुत्र अर्जुन ने ऐसे कठिन कर्म किये थे, वही आचार्य यहाँ मृत पड़े हैं। उन अस्त्रों ने उनकी रक्षा नहीं की॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 11.23: शल्य, भगदत्त, भीष्म और द्रोणको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख गान्धारीका विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 23: शल्य, भगदत्त, भीष्म और द्रोणको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख गान्धारीका विलाप  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  11.23.28 
यस्य प्रसादाद् वीभत्सु: पाण्डव: कर्म दुष्करम्।
चकार स हत: शेते नैनमस्त्राण्यपालयन्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जिनके आशीर्वाद से पाण्डवपुत्र अर्जुन ने ऐसे कठिन कर्म किये थे, वही आचार्य यहाँ मृत पड़े हैं। उन अस्त्रों ने उनकी रक्षा नहीं की॥ 28॥
 
The same Acharya, by whose blessings Arjuna, the son of Pandava, had performed such difficult deeds, is lying dead here. Those weapons did not protect him.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)