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mahabharat 11.23.22: जब शान्तनुपुत्र भीष्म भी आज शत्रुओं के बाणों से मारे जाकर सो रहे हैं, तब कहना पड़ता है कि 'युद्ध में न कोई कुशल है, न कोई विद्वान् है और न कोई वीर है।' ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 11.23: शल्य, भगदत्त, भीष्म और द्रोणको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख गान्धारीका विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 23: शल्य, भगदत्त, भीष्म और द्रोणको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख गान्धारीका विलाप  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  11.23.22 
नास्ति युद्धे कृती कश्चिन्न विद्वान‍् न पराक्रमी।
यत्र शान्तनवो भीष्म: शेतेऽद्य निहत: शरै:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जब शान्तनुपुत्र भीष्म भी आज शत्रुओं के बाणों से मारे जाकर सो रहे हैं, तब कहना पड़ता है कि 'युद्ध में न कोई कुशल है, न कोई विद्वान् है और न कोई वीर है।' ॥22॥
 
When even Shantanu's son Bhishma is sleeping today after being killed by the arrows of the enemies, then it has to be said that 'No one is skilled in war, no one is learned and no one is brave.' ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)