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mahabharat 11.23.21: पिताश्री! वे पुण्यात्मा और सर्वज्ञ हैं। वे परलोक और इहलोक के ज्ञान द्वारा समस्त आध्यात्मिक प्रश्नों का निर्णय करने में समर्थ हैं। मनुष्य होकर भी वे देवता के समान हैं; उनमें अभी भी प्राण हैं ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 11.23: शल्य, भगदत्त, भीष्म और द्रोणको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख गान्धारीका विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 23: शल्य, भगदत्त, भीष्म और द्रोणको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख गान्धारीका विलाप  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  11.23.21 
धर्मात्मा तात सर्वज्ञ: पारावर्येण निर्णये।
अमर्त्य इव मर्त्य: सन्नेष प्राणानधारयत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
पिताश्री! वे पुण्यात्मा और सर्वज्ञ हैं। वे परलोक और इहलोक के ज्ञान द्वारा समस्त आध्यात्मिक प्रश्नों का निर्णय करने में समर्थ हैं। मनुष्य होकर भी वे देवता के समान हैं; उनमें अभी भी प्राण हैं ॥21॥
 
Father! He is virtuous and omniscient. He is capable of deciding all spiritual questions through the knowledge of the other world and this world. Despite being a human, he is like a deity; he has still retained his life. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)