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कर्णिनालीकनाराचैरास्तीर्य शयनोत्तमम्।
आविश्य शेते भगवान् स्कन्द: शरवणं यथा॥ १८॥
अनुवाद
जैसे भगवान स्कन्द सरकण्डों के ढेर पर सोते थे, वैसे ही भीष्मजी कर्णी, नालिक और नाराच आदि बाणों की शय्या पर आश्रय लेकर सो रहे हैं॥18॥
Just as Lord Skanda slept on a pile of reeds, similarly Bhishmaji is sleeping taking shelter on a bed of arrows like Karni, Naleek and Narach etc. ॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥