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mahabharat 11.23.17: उन भीष्म को देखो, जो ब्रह्मचारी होकर भी मर्यादा से कभी विचलित नहीं हुए, बाणों की शय्या पर शयन कर रहे हैं, वीरता की शय्या पर शयन कर रहे हैं॥17॥   |   mahabharat अध्याय 11.23: शल्य, भगदत्त, भीष्म और द्रोणको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख गान्धारीका विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 23: शल्य, भगदत्त, भीष्म और द्रोणको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख गान्धारीका विलाप  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  11.23.17 
शरतल्पगतं भीष्ममूर्ध्वरेतसमच्युतम्।
शयानं वीरशयने पश्य शूरनिषेविते॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उन भीष्म को देखो, जो ब्रह्मचारी होकर भी मर्यादा से कभी विचलित नहीं हुए, बाणों की शय्या पर शयन कर रहे हैं, वीरता की शय्या पर शयन कर रहे हैं॥17॥
 
Look at that Bhishma, who has never strayed from dignity despite being a celibate, sleeping on a bed of arrows, a heroic bed of bravery. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)