श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 22: अपनी-अपनी स्त्रियोंसे घिरे हुए अवन्ती-नरेश और जयद्रथको देखकर तथा दु:शलापर दृष्टिपात करके गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  11.22.7-8 
पुत्रशोकाभितप्तेन प्रतिज्ञां चाभिरक्षता।
पाकशासनिना संख्ये वार्धक्षत्रिर्निपातित:॥ ७॥
एकादश चमूर्भित्त्वा रक्ष्यमाणं महात्मना।
सत्यं चिकीर्षता पश्य हतमेनं जयद्रथम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! पुत्र-वियोग से व्याकुल होकर इन्द्रकुमार अर्जुन ने अपनी प्रतिज्ञा का पालन करते हुए युद्धभूमि में वृद्धक्षत्रपुत्र जयद्रथ का वध कर दिया है। यद्यपि उसकी रक्षा के लिए पूर्ण व्यवस्था की गई थी, फिर भी अपनी प्रतिज्ञा निभाने की इच्छा रखने वाले महाबली अर्जुन ने ग्यारह अक्षौहिणी सेनाओं को भेदकर उसका वध कर दिया। यही जयद्रथ यहाँ पड़ा है। इसे देखो।
 
Shri Krishna! Distressed with grief over the loss of his son, Indrakumar Arjuna has killed Vriddhakshatra's son Jayadratha on the battlefield, keeping his promise. Although full arrangements were made for his protection, yet the great Arjuna, who wanted to fulfill his promise, killed him after piercing the eleven Akshauhini armies. This same Jayadratha is lying here. Look at him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)