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mahabharat 11.22.6: युद्धभूमि में मारे जाने पर भी उनके मुख पर पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा के समान तेज चमक रहा है।   |   mahabharat अध्याय 11.22: अपनी-अपनी स्त्रियोंसे घिरे हुए अवन्ती-नरेश और जयद्रथको देखकर तथा दु:शलापर दृष्टिपात करके गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 22: अपनी-अपनी स्त्रियोंसे घिरे हुए अवन्ती-नरेश और जयद्रथको देखकर तथा दु:शलापर दृष्टिपात करके गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  11.22.6 
अतीव मुखवर्णोऽस्य निहतस्यापि शोभते।
सोमस्येवाभिपूर्णस्य पौर्णमास्यां समुद्यत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि में मारे जाने पर भी उनके मुख पर पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा के समान तेज चमक रहा है।
 
Even after being killed on the battle-field, the radiance on his face is still shining brightly, like the full moon rising on a full moon day. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)