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mahabharat 11.22.5: श्री कृष्ण! देखो, महाधनुर्धर प्रतिनन्दन बुद्धिमान बाह्लीक भाले से घायल होकर सोये हुए सिंह के समान लेटे हुए हैं॥5॥   |   mahabharat अध्याय 11.22: अपनी-अपनी स्त्रियोंसे घिरे हुए अवन्ती-नरेश और जयद्रथको देखकर तथा दु:शलापर दृष्टिपात करके गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 22: अपनी-अपनी स्त्रियोंसे घिरे हुए अवन्ती-नरेश और जयद्रथको देखकर तथा दु:शलापर दृष्टिपात करके गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  11.22.5 
प्रातिपेयं महेष्वासं हतं भल्लेन बाह्लिकम्।
प्रसुप्तमिव शार्दूलं पश्य कृष्ण मनस्विनम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! देखो, महाधनुर्धर प्रतिनन्दन बुद्धिमान बाह्लीक भाले से घायल होकर सोये हुए सिंह के समान लेटे हुए हैं॥5॥
 
Sri Krishna! Look, the great archer, Pratipanandana, the wise Bahlik, is lying like a sleeping lion after being struck by a spear. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)