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mahabharat 11.22.18: उस अजेय वीर को उन्मत्त हाथी की भाँति चारों ओर से घेरकर ये चन्द्रमुखी स्त्रियाँ रो रही हैं।   |   mahabharat अध्याय 11.22: अपनी-अपनी स्त्रियोंसे घिरे हुए अवन्ती-नरेश और जयद्रथको देखकर तथा दु:शलापर दृष्टिपात करके गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 22: अपनी-अपनी स्त्रियोंसे घिरे हुए अवन्ती-नरेश और जयद्रथको देखकर तथा दु:शलापर दृष्टिपात करके गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  11.22.18 
तं मत्तमिव मातङ्गं वीरं परमदुर्जयम्।
परिवार्य रुदन्त्येता: स्त्रियश्चन्द्रोपमानना:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उस अजेय वीर को उन्मत्त हाथी की भाँति चारों ओर से घेरकर ये चन्द्रमुखी स्त्रियाँ रो रही हैं।
 
Surrounding that most invincible hero from all sides like a mad elephant, these moon-faced ladies are crying.
 
इति श्रीमहाभारते स्त्रीपर्वणि स्त्रीविलापपर्वणि गान्धारीवाक्ये द्वाविंशोऽध्याय:॥ २२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत स्त्रीपर्वके अन्तर्गत स्त्रीविलापपर्वमें गान्धारीका वाक्यविषयक बाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)