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mahabharat 11.22.16: हाय! हाय! हाय! देखो, दुशाला अपने पति का सिर न पाकर शोक और भय से रहित होकर इधर-उधर दौड़ रही है।   |   mahabharat अध्याय 11.22: अपनी-अपनी स्त्रियोंसे घिरे हुए अवन्ती-नरेश और जयद्रथको देखकर तथा दु:शलापर दृष्टिपात करके गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 22: अपनी-अपनी स्त्रियोंसे घिरे हुए अवन्ती-नरेश और जयद्रथको देखकर तथा दु:शलापर दृष्टिपात करके गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  11.22.16 
हा हा धिग् दु:शलां पश्य वीतशोकभयामिव।
शिरो भर्तुरनासाद्य धावमानामितस्तत:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हाय! हाय! हाय! देखो, दुशाला अपने पति का सिर न पाकर शोक और भय से रहित होकर इधर-उधर दौड़ रही है।
 
Alas! alas! woe to her! See, Dushala is running hither and thither, as if devoid of grief and fear, because she has not found her husband's head.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)