Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 11.22.15: श्री कृष्ण! मेरे लिए इससे अधिक दुःख की बात और क्या हो सकती है कि मेरी पुत्री इतनी छोटी आयु में ही विधवा हो गई और मेरी सभी बहुएँ भी अनाथ हो गईं॥15॥   |   mahabharat अध्याय 11.22: अपनी-अपनी स्त्रियोंसे घिरे हुए अवन्ती-नरेश और जयद्रथको देखकर तथा दु:शलापर दृष्टिपात करके गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 22: अपनी-अपनी स्त्रियोंसे घिरे हुए अवन्ती-नरेश और जयद्रथको देखकर तथा दु:शलापर दृष्टिपात करके गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  11.22.15 
किं नु दु:खतरं कृष्ण परं मम भविष्यति।
यत् सुता विधवा बाला स्नुषाश्च निहतेश्वरा:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! मेरे लिए इससे अधिक दुःख की बात और क्या हो सकती है कि मेरी पुत्री इतनी छोटी आयु में ही विधवा हो गई और मेरी सभी बहुएँ भी अनाथ हो गईं॥15॥
 
Sri Krishna! What could be more saddening for me than the fact that my daughter became a widow at such a young age and all my daughters-in-law also became orphans. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)