Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.22.12-13: जनार्दन! जिस दिन जयद्रथ द्रौपदी का हरण करके केकयों के साथ भागा था, उस दिन पाण्डवों ने उसे मार डाला था; किन्तु उस समय दु:शला के सम्मान के कारण उन्होंने जयद्रथ को जीवित छोड़ दिया था! श्रीकृष्ण! उन्हीं पाण्डवों ने आज उसका सम्मान क्यों नहीं किया?॥12-13॥ | mahabharat अध्याय 11.22: अपनी-अपनी स्त्रियोंसे घिरे हुए अवन्ती-नरेश और जयद्रथको देखकर तथा दु:शलापर दृष्टिपात करके गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदा कृष्णामुपादाय प्राद्रवत् केकयै: सह।
तदैव वध्य: पाण्डूनां जनार्दन जयद्रथ:॥ १२॥
दु:शलां मानयद्भिस्तु तदा मुक्तो जयद्रथ:।
कथमद्य न तां कृष्ण मानयन्ति स्म ते पुन:॥ १३॥
अनुवाद
जनार्दन! जिस दिन जयद्रथ द्रौपदी का हरण करके केकयों के साथ भागा था, उस दिन पाण्डवों ने उसे मार डाला था; किन्तु उस समय दु:शला के सम्मान के कारण उन्होंने जयद्रथ को जीवित छोड़ दिया था! श्रीकृष्ण! उन्हीं पाण्डवों ने आज उसका सम्मान क्यों नहीं किया?॥12-13॥
Janardan! The day Jaydrath abducted Draupadi and fled with the Kekayas, he was killed by the Pandavas; but at that time, out of respect for Dushala, they left Jaydrath alive! Shri Krishna! Why did the same Pandavas not respect him today?॥12-13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥