श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 21: गान्धारीके द्वारा कर्णको देखकर उसके शौर्य तथा उसकी स्त्रीके विलापका श्रीकृष्णके सम्मुख वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  11.21.3 
अमर्षी दीर्घरोषश्च महेष्वासो महाबल:।
रणे विनिहत: शेते शूरो गाण्डीवधन्वना॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वीर कर्ण बड़ा बलवान और महान धनुर्धर था। वह बहुत समय तक क्रोध में भरा हुआ था और युद्ध करने में असमर्थ था, किन्तु गाण्डीवधारी अर्जुन के हाथ से मारा जाने पर यह वीर रणभूमि में सो गया है। 3॥
 
The brave Karna was very strong and a great archer. He was full of anger for a long time and was non-combatant, but after being killed by the hand of Gandiva-wielding Arjuna, this brave man has fallen asleep in the battlefield. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)