बेचारी कर्ण की पत्नी ज़मीन पर गिर पड़ी और फिर उठकर फिर गिर पड़ी। कर्ण का चेहरा सूंघकर यह स्त्री अपने पुत्र की हत्या के कारण फूट-फूट कर रो रही है।
That poor Karna's wife fell on the ground and then got up and fell again. Smelling Karna's face, this woman is crying bitterly due to the murder of her son.
इति श्रीमहाभारते स्त्रीपर्वणि स्त्रीविलापपर्वणि कर्णदर्शनो नामैकविंशोऽध्याय:॥ २१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत स्त्रीपर्वके अन्तर्गत स्त्रीविलापपर्वमें कर्णका दर्शनविषयक इक्कीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २१॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)