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mahabharat 11.21.14: बेचारी कर्ण की पत्नी ज़मीन पर गिर पड़ी और फिर उठकर फिर गिर पड़ी। कर्ण का चेहरा सूंघकर यह स्त्री अपने पुत्र की हत्या के कारण फूट-फूट कर रो रही है।   |   mahabharat अध्याय 11.21: गान्धारीके द्वारा कर्णको देखकर उसके शौर्य तथा उसकी स्त्रीके विलापका श्रीकृष्णके सम्मुख वर्णन   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 21: गान्धारीके द्वारा कर्णको देखकर उसके शौर्य तथा उसकी स्त्रीके विलापका श्रीकृष्णके सम्मुख वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  11.21.14 
सा वर्तमाना पतिता पृथिव्या-
मुत्थाय दीना पुनरेव चैषा।
कर्णस्य वक्त्रं परिजिघ्रमाणा
रोरूयते पुत्रवधाभितप्ता॥ १४॥
 
 
अनुवाद
बेचारी कर्ण की पत्नी ज़मीन पर गिर पड़ी और फिर उठकर फिर गिर पड़ी। कर्ण का चेहरा सूंघकर यह स्त्री अपने पुत्र की हत्या के कारण फूट-फूट कर रो रही है।
 
That poor Karna's wife fell on the ground and then got up and fell again. Smelling Karna's face, this woman is crying bitterly due to the murder of her son.
 
इति श्रीमहाभारते स्त्रीपर्वणि स्त्रीविलापपर्वणि कर्णदर्शनो नामैकविंशोऽध्याय:॥ २१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत स्त्रीपर्वके अन्तर्गत स्त्रीविलापपर्वमें कर्णका दर्शनविषयक इक्कीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २१॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)