श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 21: गान्धारीके द्वारा कर्णको देखकर उसके शौर्य तथा उसकी स्त्रीके विलापका श्रीकृष्णके सम्मुख वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  11.21.13 
अल्पावशेषोऽपि कृतो महात्मा
शरीरभक्षै: परिभक्षयद्भि:।
द्रष्टुं न न: प्रीतिकर: शशीव
कृष्णस्य पक्षस्य चतुर्दशाहे॥ १३॥
 
 
अनुवाद
महाबुद्धिमान कर्ण के शरीर का अधिकांश भाग मनुष्य-भक्षक पशुओं ने खा लिया है और थोड़ा-सा ही बचा है। उसका यह छोटा-सा शरीर, कृष्णपक्ष की चतुर्दशी के चन्द्रमा के समान, हमें देखकर सुख नहीं देता।॥13॥
 
The animals that eat human bodies have eaten away much of the body of the great-minded Karna and have left only a little of it. This little body of his, like the moon on the Chaturdashi of the dark fortnight, does not give us happiness when we see it.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)