श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 21: गान्धारीके द्वारा कर्णको देखकर उसके शौर्य तथा उसकी स्त्रीके विलापका श्रीकृष्णके सम्मुख वर्णन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  11.21.12 
हाहा धिगेषा पतिता विसंज्ञा
समीक्ष्य जाम्बूनदबद्धकक्षम्।
कर्णं महाबाहुमदीनसत्त्वं
सुषेणमाता रुदती भृशार्ता॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हाय! हाय! मैं लज्जित हूँ। स्वर्ण-कवचधारी, उदार हृदय वाले महाबाहु कर्ण को इस अवस्था में देखकर सुषेण की माता अत्यन्त व्याकुल हो गयीं और रोते-रोते मूर्छित होकर गिर पड़ीं।
 
Alas! Alas! I am ashamed. Seeing the golden-armoured, generous-hearted Mahabahu Karna in this state, Sushena's mother became very anxious and weeping and fell unconscious.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)