श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 21: गान्धारीके द्वारा कर्णको देखकर उसके शौर्य तथा उसकी स्त्रीके विलापका श्रीकृष्णके सम्मुख वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  11.21.1 
गान्धार्युवाच
एष वैकर्तन: शेते महेष्वासो महारथ:।
ज्वलितानलवत् संख्ये संशान्त: पार्थतेजसा॥ १॥
 
 
अनुवाद
गांधारी बोली- श्री कृष्ण! देखो, यह महाधनुर्धर, महारथी वैकर्तन कर्ण युद्धस्थल में कुन्तीकुमार अर्जुन के तेज से बुझ गई प्रज्वलित अग्नि के समान शान्तिपूर्वक सो रहा है।
 
Gandhari said- Shri Krishna! Look, this great archer, the great charioteer, Vaikartana Karna, is sleeping peacefully in the battlefield, like a blazing fire extinguished by the brilliance of Kuntikumar Arjuna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)