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mahabharat 11.20.6-7: सुभद्रा के पुत्र का मुख खिले हुए कमल के समान है। उसकी गर्दन शंख के समान गोल है। मनोहर रूप और सौन्दर्य से विभूषित, आदरणीय एवं बुद्धिमान उत्तरा अपने पति का मुख सूंघकर उनका आलिंगन कर रही है। पहले भी वह इसी प्रकार मधु के नशे में अचेत होकर, लज्जा से उनका आलिंगन करती रही होगी। 6-7।   |   mahabharat अध्याय 11.20: गान्धारीद्वारा श्रीकृष्णके प्रति उत्तरा और विराटकुलकी स्त्रियोंके शोक एवं विलापका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  11.20.6-7 
तस्य वक्त्रमुपाघ्राय सौभद्रस्य मनस्विनी।
विबुद्धकमलाकारं कम्बुवृत्तशिरोधरम्॥ ६॥
काम्यरूपवती चैषा परिष्वजति भामिनी।
लज्जमाना पुरा चैनं माध्वीकमदमूर्च्छिता॥ ७॥
 
 
अनुवाद
सुभद्रा के पुत्र का मुख खिले हुए कमल के समान है। उसकी गर्दन शंख के समान गोल है। मनोहर रूप और सौन्दर्य से विभूषित, आदरणीय एवं बुद्धिमान उत्तरा अपने पति का मुख सूंघकर उनका आलिंगन कर रही है। पहले भी वह इसी प्रकार मधु के नशे में अचेत होकर, लज्जा से उनका आलिंगन करती रही होगी। 6-7।
 
The face of Subhadra's son looks like a blooming lotus. His neck is round like a conch shell. The respectable and intelligent Uttara, adorned with a lovely form and beauty, is smelling the face of her husband and embracing him. Earlier also she must have been embracing him in the same way, unconscious due to the intoxication of honey, with shyness. 6-7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)