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mahabharat 11.20.24: ऐसा प्रतीत होता है कि मृत्युकाल आने से पहले किसी का भी मरना बहुत कठिन है, इसीलिए मैं, यह अभागिनी स्त्री, युद्ध में तुम्हें मारा हुआ देखकर भी जीवित हूँ॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 11.20: गान्धारीद्वारा श्रीकृष्णके प्रति उत्तरा और विराटकुलकी स्त्रियोंके शोक एवं विलापका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  11.20.24 
दुर्मरं पुनरप्राप्ते काले भवति केनचित्।
यदहं त्वां रणे दृष्ट्वा हतं जीवामि दुर्भगा॥ २४॥
 
 
अनुवाद
ऐसा प्रतीत होता है कि मृत्युकाल आने से पहले किसी का भी मरना बहुत कठिन है, इसीलिए मैं, यह अभागिनी स्त्री, युद्ध में तुम्हें मारा हुआ देखकर भी जीवित हूँ॥ 24॥
 
'It seems that it is very difficult for anyone to die before the time of death arrives, that is why I, this unfortunate woman, am still alive even after seeing you killed in the war.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)