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mahabharat 11.20.18: धिक्कार है उन कृपाचार्य, कर्ण और जयद्रथ जैसे क्रूर लोगों को, धिक्कार है द्रोणाचार्य और उनके पुत्र को भी, जिन्होंने मुझे इस उम्र में विधवा बना दिया॥18॥   |   mahabharat अध्याय 11.20: गान्धारीद्वारा श्रीकृष्णके प्रति उत्तरा और विराटकुलकी स्त्रियोंके शोक एवं विलापका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  11.20.18 
धिगस्तु क्रूरकर्तॄंस्तान् कृपकर्णजयद्रथान्।
द्रोणद्रौणायनी चोभौ यैरहं विधवा कृता॥ १८॥
 
 
अनुवाद
धिक्कार है उन कृपाचार्य, कर्ण और जयद्रथ जैसे क्रूर लोगों को, धिक्कार है द्रोणाचार्य और उनके पुत्र को भी, जिन्होंने मुझे इस उम्र में विधवा बना दिया॥18॥
 
Shame on those cruel people like Kripacharya, Karna and Jayadratha, shame on Dronacharya and his son too, who made me a widow at this age.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)