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स्वस्रीयं वासुदेवस्य पुत्रं गाण्डीवधन्वन:।
कथं त्वां रणमध्यस्थं जघ्नुरेते महारथा:॥ १७॥
अनुवाद
प्राणनाथ! वे वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण के भतीजे और गाण्डीवधारी अर्जुन के पुत्र थे। इन महारथियों ने युद्धभूमि के मध्य खड़े होकर आपको किस प्रकार मार डाला? 17॥
'Prannath! He was the nephew of Vasudevanandan Shri Krishna and the son of Gandivadhari Arjun. How did these great warriors kill you while standing in the middle of the battlefield? 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥